दुतिया ऐसी ही है जब तुम्हें दुख पड़ेगा तब हिम्मत रखने को कहेगी जब खुद को दुख पड़ेगा तो पूरी दुनिया में अपना दुखड़ा रोएगी जो अब तक तुमको ज्ञान दे रही थी वो फिर दुख क्या होता है इसका ज्ञान दुनिया को देगी। दुनिया ऐसी ही है जो अपना दुख अपना दूसरों के दुख को सिर्फ तमाशे जैसा देखती है।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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