Skip to main content

Women struggle Article: नारी जन्म से लेकर मरण तक कहीं स्वतंत्र नहीं



ये बात कहने में जिंदगी कड़वी हैं उतनी ज्यादा सच है कि एक महिला के तौर पर भारत जैसे देश में रहने का मतलब अनेक तरह के बंधनों से बंध जाना है। जहां उसकी जिंदगी उसके हिसाब से नहीं बल्कि इस हिसाब से चलती है कि लोग क्या कहेंगे।
जो अनेक तरह की बेड़ियों में लिपटीं। जो कहीं भी स्वतंत्र नहीं है यहां तक की जब वो मृत्यु शय्या पर हो उस वक्त भी उसे दस तरह के नियम कायदों को मानना पड़ता है।  जहां उसके अपने उसकी लाश की फ्रिक नहीं करते जो नियमों में बांधकर उसे चैन से मरने नहीं देते हैं। अफसोस इसके बावजूद आज की आधुनिक लड़की जो खुद को आधुनिक बताती हैं वो भी इस तरह के बंधनों में लिपटी हुई है। जो सिर्फ एक भारतीय नारी बनना चाहती है।न कि एक समाज सुधारक नारी जिसे देखकर आज भी सावित्री बाई फुले जैसी महिलाओं के साहस की तारीफ करना बनता है जिन्होंने समाज के उस बंधनों को तोड़ जो समाज की आधुनिक महिलाएं आज तक नहीं तोड़ पायी है।

Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..