कहने को तो सब कहते हैं कि वो तुम्हारे लिए ये कर सकते हैं वो कर सकते हैं लेकिन ये तो समय और पैसा बताता है कि वो ये दोनों हमारे लिए कितना खर्च करते हैं।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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