सब कहने की बातें हैं कि जहां चाह वहां राह बन जाती है एक समय के बाद हम उस मोड़ पर खड़े होते हैं जहां हमें अपनी राह बनानी होती है। फिर भले उसके लिए हमें कितनी कीमत क्यों न चुकानी हो।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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