जब जब लगता है न कि हम दुनियादारी को समझ गये तब तब वो हमें एक न एक ऐसा पाठ जरूर पढ़ाती है जो हमें बता देता है कि हम अब भी कितने ज्यादा नासमझ है।। जो जैसा दिखता है उस को सच मान लेते हैं जबकि दुनिया ऐसी होती नहीं।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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