मिसालें दी जाती है बोली नहीं जाती है । आज भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने भी एक ऐसी मिसाल पेश की है जो हमेशा याद रखी जाएगी। जिन्होंने पूरे 52 साल के बाद टूर्नामेंट में जीत हासिल की है। विमेंस वनडे वर्ल्ड कप अपने नाम किया।साउथ अफ्रीका को 52 रन से हराकर शानदार जीत दर्ज की है जो कई मायनों में खास हैं।
आज जब हम क्रिकेट का नाम लेते हैं तो हमारे मुंह से जो नाम निकलता है उसमें विराट कोहली , रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी ही हमें याद आते हैं। लेकिन कल की जीत ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम के नाम हमें याद करने को मजबूर किया। जिनके नाम से महिला क्रिकेट जाना जाएगा फिर वो चाहे कप्तान हरमनप्रीत कौर की कप्तानी हो या ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा जिन्होंने ये सिद्ध किया कि मैदान में कोई भी खेले वो क्रिकेट ही होगा। उसे महिलाएं खेल रही है इससे उसका नाम नहीं बदलेगा।
जो अब भारत की हर उस लड़की को मैच को बतौर अपना व्यवसाय चुनने की आजादी देगा। जिन्हें ये कहा जाता है कि ये खेल लड़कियों के बस का नहीं है।
पूरे मैच का अगर हम विश्लेषण करें तो मैच शुरू से ही काफी रोमांचक रहा। जहां कभी भारत और कभी साउथ अफ्रीका दोनों की बैटिंग बॉलिंग ने हमें मैच देखने को मजबूर किया। जहां हर एक रन और विकेट के साथ हमारी दिल की धड़कनें बढ़ा रहीं थीं।
कैप्टन हरमनप्रीत कौर की कप्तानी ने जहां मैच में एक नई जान सी फूंकी थी। वहीं
स्मृति मंदाना की बॉलिंग और बैटिंग काफी जबरदस्त थी। जिन्होंने साउथ अफ्रीका का डटकर मुकाबला किया। शैफाली जो सेमीफाइनल में आयी। जिन्हें प्रीतिका की जगह पर रिप्लेस किया गया था उनका खेल शानदार रहा। बतौर युवा खिलाड़ी श्री चरणनी का प्रदर्शन अच्छा रहा। वहीं मध्यप्रदेश की क्रांति गौड़ ने भी खेल में बेहतर प्रदर्शन किया जो हर एक आदिवासी समाज के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनी।

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