इस दुनिया में जरूरी नहीं की तुम्हारे साथ सब अच्छा ही होगा । क ई बार तुम्हारे साथ बुरा से बुरा होगा। जब तुम चाहोगे कि कोई तुम्हारा साथ दे तब तुम खुद को अकेला खड़ा पाओगे। उस समय दुनिया की एक अलग वास्तविकता से तुम्हारा वास्ता होगा। उस दिन टूटना नहीं तुम्हें संभालना होगा ।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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