इतना भी आसान नहीं अपने पैरों पर खड़ा होना जिसकी पहली शर्त ही अपने सिद्धांतों से समझौता करना। किसी से कुछ न कहना है।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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