एक समय के बाद ये पता चलता है कि दुनिया ईमानदारों की नहीं बल्कि चालक लोगों की है। जिनसे लड़ने के लिए तुम्हें उन जैसा बनना पड़ेगा।
हम जितना जानते हैं उसका एक अंश ही हमारे पास बचता है।
जो जितना जानता है वो उतना ज्ञानी हो ये ज़रूरी नहीं कम जानकार भी जो दुनिया जान ले वो असल में सर्वश्रेष्ठ होता है।
दुनिया तो कुछ भी कहेगी लेकिन हमें असल बनना क्या है ये हम पर निर्भर करता है।

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