दशहरा हमें सिखाता है ज्ञान, दौलत, धार्मिक कितने भी हो पर सबके कर्मों का हिसाब जरूर होता है। देर से ही सबको इसी जन्म में अपने कर्मों का हिसाब देना होता है।
जब रावण की सोने की लंका न बची, रावण का ज्ञान न बचा तब ये तुच्छ इंसान की आखिर क्या औकात है ।समय सबका हिसाब देर से ही सही करता जरूर है।
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