क्या शूर्पणखा दहन किया जाना चाहिए
दशहरे में रावण का दहन किया जाता है।ये दिन बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर देखा जाता हैं
। पर इस बार दशहरे की चर्चा किसी खास चीज के लिए की जा रही है।
वो हैं इंदौर में पौरुष संस्था के द्वारा शूर्पणखा के दहन करने की। जिसमें सोनम रघुवंशी के साथ उसे जैसी तमाम युवतियों के नाम थे जिन्होंने अपने पति या पुरुष को धोखा दिया।उनकी हत्या की या उन्हें आत्महत्या करने को मजबूर किया।जिनका इस बार पुतला दहन किये जाने की कोशिश थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है।
इसके बावजूद जब शूर्पणखा के दहन पर जोर दिया जा रहा है।तब ये सवाल वाजिब हो गया है।कि सदियों से महिलाओं के साथ गलत करने वाले आज किस मुंह से महिलाओं के पुतले का दहन करने जा रहे हैं। जिन्होंने कैंडल मार्च से ज्यादा आज तक कुछ नहीं किया।
जिस समाज ने महिलाओं के साथ गलत होने पर किसी पुरुष के पुतले का दहन नहीं किया। जिन्होंने तब भी उस महिला को ही गलत पाया। वो शूर्पणखा का दहन कर रहे हैं।
इस सब के बावजूद भी अगर शूर्पणखा का दहन होता है तो करिए लेकिन उससे पहले उन रावणों का भी दहन की जाएं। जिनके चलते कोई भी सीता सुरक्षित नहीं है।

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