बहुरूपिए बनते लोग
हम सब के दो रूप है..एक वो जो हम सबको दिखाते है..एक वो जो हम सबसे छिपाते है..जो रूप हमारा कभी कभी ही सामने आता है..और जब आता है..तब हम हैरान हो जाते है..ये रूप अच्छा हो ऐसा बिल्कुल भी जरूरी नहीं कई बार इसके चलते हमें परेशानी का भी सामना करना पड़ता है..जो हमारा वास्तविक रूप दिखाता है..जो हम सबसे छिपाते है..जिसके आने से हम दुनिया के बीच एक अलग ही रूप में आते है...

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