14 सितंबर एक ऐसा दिन जब हम सब ये दिखाने की कोशिश करते है कि हम हिंदी को भूले नहीं है..ये भाषा आज भी हमारे जेहन में है..हम इस भाषा से आज भी इतना ही प्रेम करते है..जितना की पहले करते थे..हिंदी केवल हमारी राजभाषा नहीं बल्कि हमारी मातृभाषा भी है..जिससे हम भला कैसे दूर हो सकते है..साल के केवल एक दिन हम सब ये दिखाने की कोशिश करते है..
बाकी दिन तो हम अंग्रेजी भाषा के गीत गाते रहते है..उस भाषा का गुणगान करते है..जैसे अंग्रेजी भाषा ने ही हमें असली क्रांति दिलायी हो..वहीं हमारी उद्धारक रही हो..
हमें हर भाषा का सम्मान करना चाहिए..उसे पढ़ना चाहिए..और जब बात अंग्रेजी को तब तो हमें उसे जरूर सीखना चाहिए।.
लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि हम अपनी भाषा कोे पराया कर दे..उसे भूल जाए..अपनी भाषा को घृणा की नजर से देखने लगे..
आज हिंदी की हमने वहीं गति कर दी है..जो हमारे देश में नदियों की हो रही है..जो मनाते तो हम माता है..लेकिन हम उसे हर तरीके से कर रहे सिर्फ प्रदूषित है..कहीं ऐसा न हो कि हम अपनी पहचान ही खो दे..अब भी समय है..हमें अपनी भाषा को महत्व देना होगा..वो हमारे लिए मायने रखती है..ये किसी और से हमें नहीं सीखना होगा...

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