किसी चीज का रास्ता कठिन है इसमें कोई बात नहीं बात तब ज्यादा बुरी है जब हमें मालूम ही नहीं चले की हमें किस रास्ते जाना है।
चारों तरफ जब भटकाव का बाजार है ऐसे समय में किस ओर मुड़ जाना है ये केवल हम पर निर्भर करता है।
लोग वही सुनें और देखेंगे जो वो देखना चाहते हैं इसलिए ऐसे लोगों से समझने में अपना समय न गवाएं।
कीमत हर चीज मांगती है फर्क ये है कुछ चीजों की कीमत हमें मालूम चल जाती है कुछ की कीमत चुकाने के बाद समझ आती है।
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