हर व्यक्ति अपनी जगह पर संघर्ष कर रहा है। फर्क महज इतना सा है कुछ का संघर्ष दिखाई दे देता है कुछ का नहीं।
चार लोग चार तरह की बातें बनाएंगे। ये हम पर निर्भर करता है कि हम अपनी सुनते हैं या उन चार लोगों की।
कई बार हम वहां नहीं बोल पाते जहां सबसे ज्यादा जरूरत थी बोलने की।
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