बहुत आसान है किसी की मजबूरी को उसका बहाना मान लेना। पर उससे कहीं अधिक मुश्किल है उस जगह पर खड़े होकर उसके जैसा सोचना। जहां उस मजबूरी के चलते उसे कितना कुछ खोना पड़ रहा है ये वो ही जानता है। बहुत आसान है किसी को मतलबी कह देना पर वो ऐसा क्यों हुआ ये केवल वो ही जानता है।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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