Rabindranath Tagore’s:एकला चलो रे


एकला चलो रे
जब समझने वाला कोई न हो, जब बात बात पर तुम्हें खुद  को सिद्ध करना पड़ जाए तब तुम्हें अकेले ही चलना चाहिए। 
जब लगे की लोग तुम्हारी अच्छाई के काबिल नहीं तब अकेला ही निकल जाना चाहिए। जब लगे कि तुम्हारा कोई नहीं तुम्हें समझने वाला कोई नहीं तब तुम्हें अकेला चलना चाहिए। 
आज के समय में जब हर चीज में स्वार्थ छिपा है। ऐसे समय में अकेला ही चलना चाहिए। 

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