आज विज्ञान ने भले जितनी प्रगति कर ली हो। लेकिन उसके बावजूद बहुत सी ऐसी चीजें है जिन पर लोगों का विश्वास पहले की अपेक्षा ज्यादा बढ़ा है जो कहीं न कहीं एक सवाल खड़ा करता है कि आखिर आज भी लोग क्या इतने भोले भाले है। जो श्रद्धा के नाम एक ऐसी भीड़ का हिस्सा बन जाते हैं। जो कि दिशा हीन है। जो खुद भक्ति में ओत प्रोत होते कब एक ऐसी चीज का हिस्सा बन जाती है। जिसके बारे में सिर्फ कह गया है।
अब बात कुबेरेश्वर धाम की ही ले लो। जहां पर सावन के माह में रुद्राक्ष वितरण का काम किया जाता है। जिसकी श्रद्धा से ज्यादा अव्यवस्था की खबरें ज्यादा आती है। जहां पर भगदड़ होना आम सा हो गया है। जो कहीं न कहीं श्रद्धा के बीच अव्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।

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