अब समझ आता है कितना मुश्किल होता होगा उसके लिए जो घर से बाहर कमाने जाता होगा कितना कुछ वो उसके पीछे त्याग करता होगा। सैलरी के अलावा वो सब कुछ खोता जाता है। जिसका हिसाब वो कुछ नहीं दे पाता है।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
Comments