इतनी हिम्मत हम सबके पास होनी चाहिए कि हम अपना विश्लेषण कर सके। जहां हम गलत को गलत सही को सही कह सके। भले इस बीच हमें खुद को असहनीय दर्द क्यों न देना पड़े।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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