जो मिल गया केवल वहीं श्रेष्ठ है ये सोच अक्सर इंसान की जिन्दगी नरक बना देती है। जहां वो एक ऐसे स्थान पर खड़े हो जाता है। जिसका आदि अंत दोनों ही उसके नियंत्रण से हटकर किसी और के हाथों चल जाता है।
पर अफसोस इंसान किसी चीज के परे कहां कुछ सोच पाता है। वो तो उसी स्थान पर आकर टिक जाता है उसे लगता है जो मिला वहीं श्रेष्ठ है जो अक्सर उसे तबाहा कर डालता है।
इसके बावजूद जो लोग लड़ते हैं अपने आज से एक बेहतरी की तलाश में वो जिंदगी में बहुत कुछ श्रेष्ठ कर पाते हैं।
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