World Environment Day 2025: वरदान से अभिशाप तक प्लास्टिक की कहानी



प्लास्टिक सस्ता, सुंदर और टिकाऊ। जो लंबे समय तक चलता है। और सस्ते में बड़ी सहजता से इसे पाया जा सकता है। शायद यहीं कारण है कि इसके टिकाऊपन के चलते हमें इसके दुष्प्रभाव नहीं दिखते। 

कहते हैं परिवर्तन संसार का नियम है लेकिन ऐसा परिवर्तन किस काम का। जो हमें विकास से विनाश की ओर ले जाता हो। जिसके चलते हमें परेशानी का सामना करना पड़ता हो। जो आज हमारे खाने की थाली तक पहुंच गया है। 

प्लास्टिक आज न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय परेशानी बन चुका है। जिसका अगर समय रहते त्याग नहीं किया तो वो दिन दूर नहीं जब हमें इसका बड़ा खमियाजा भुगतान पड़ेगा। 
इसलिए अभी भी देर नहीं हुई हमें प्लास्टिक का उत्पादन घटाने पर जोर देना होगा।
 सिगल यूज प्लास्टिक पर पूर्णता प्रतिबंध घोषित करना होगा । जिसके लिए जरूरी है प्लास्टिक की जगह पर्यावरण के अनुकूल बैग आए। जिसके लिए जरूरी है कि उनका दाम कम हो जिसे लेने के लिए लोगों को अपनी जेब न देखनी पड़े। इसके लिए सरकार से लेकर लोगों को काम करने की जरूरत है। 

Comments