आज भी बहुत कुछ नहीं बदला है
आज भी इंसान एक तरह का मजदूर ही है
जो सिर्फ कॉरपोरेट का मजदूर हो गया है
जहां जाने का समय निश्चित
पर आने का कोई समय नहीं है
आज भी बहुत कुछ नहीं बदला है
जहां नियम के नाम पर दस चीज
पर सैलरी और अप्रेजल को लेकर सब कुछ वैसा ही चल रहा है
आज भी बहुत कुछ नहीं बदला है।
फर्क महज इतना सा है कि इंसान आज डिग्री धारी कॉरपोरेट मजदूर बन गया है।
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