केवल बोलना ही तो नहीं है
कहते हैं कि अति किसी चीज की हो वो बुरी ही होती है फिर वो अति का बोलना हो या अति का चुप रहना। लेकिन लगता है कि जैसे हमारे नेता इस वाक्य को भूल ही गए हैं जिसके चलते उनके मुंह में जो आए वो ही बोल देते हैं। बिना ये सोचे की इसका समाज पर क्या असर होगा।
जिस पर अब एक नियम लाने की जरूरत है कहीं ऐसा न हो कि बाद में हमें पछताना पड़े।

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