कितनी अजीब बात है न दो चार पुरुष उत्पीड़न के मामले आ गये तो हर कोई महिलाओं पर टिप्पणी करने लगा। लेकिन वो अब भी उनके साथ सदियों से हो रहे अन्याय पर चुप है। जो वो हमेशा से सहती आ रही है। हद तो ये हो गयी है कि देश में बढ़ते रेप के मामले पर भी चुप है जहां छ महीने की बच्ची को भी नहीं छोड़ा जा रहा। कैसे कह दूं कि सिर्फ महिला ही गलत है।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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