phule movie: क्यों न करें हम फुले मूवी का सपोर्ट






जो लोग आज 'फुले' मूवी की ये कहकर आलोचना कर रहे है... कि इसमें ब्राहाण समाज को गलत रूप से दिखा गया है..उनका गलत तरीके से चित्रण किया गया है...उनको अपने आस पास जरूर देखना चाहिए. कि वो खुद कितने मॉर्डन है..वो खुद कितने ज्यादा उदारवादी है..जो जात पात से बिल्कुल भी ताल्लुक नहीं रखते है...







जहां 2025 में भी बातचीत की शुरूआत इससे ही होती है..कि भाई तेरी जात कौन सी है...जहां लोग केवल अपनी जाति के आधार पर लोगों को कम आंकते है...ये कहते नहीं थकते..कि हम ब्राहाण है..ब्राहाण खून है.वो देखों ठाकुर आ रहा है...ठाकुर ये न कर वो न कर...ऐसे में हम कैसे कह सकते है...कि हम जाति को नहीं  मानते है...

फिर फुले मूवी का हम कैसे विरोध कर दे..जिसमें भारत की जाति प्रथा की वास्तविक चित्रण किया गया है..जो कोई कहानी नहीं हमारा इतिहास है...जिसको लेकर आज भी हम उतने ही क्रूर है.जितने पहले थे..
जहां आज भी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लोगों के साथ बर्बरता की हदें पार कर दी जाती है..कभी दुल्हे को घोड़ी से उतार दिया जाता है..तो कभी उसके ऊपर पेशाब कर दिया जाता है..कभी उसकी बेटी के साथ रेप कर दिया जाता है..गांव कस्बे छोड़िए शहरों  में भी वर्ण व्यवस्था का रूप देखा जाता है...

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