जिस पर एक्शन लिया जाना चाहिए। इसके अलावा जिम्मेदार अफसर, सरकार सुरक्षा व्यवस्था की देखरेख कर रहे लोगों से भी सवाल पूछा जाना चाहिए। कि आखिर वो उस समय कहां थे। क्योंकि प्रश्न अब राजनीति से ज्यादा लोगों की सुरक्षा का है।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।

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