आज वो कितना भावुक क्षण रहा होगा। जब किसी लाल, किसी का घरवाला, किसी का पिता अपने घर मृतक के रूप में पहुंचा होगा।
कितने आंसू कितने लोग उस समय टूटेंगे होंगे, जब उनका अपना आज उनके सामने पंचतत्व में विलीन हुआ होगा।
दफन हुई होगी न जाने कितनी अनगिनत कहानियां जिन्हें हिन्दू होने की सजा मिली हुई होगी।
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