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Ambedkar Jayanti 2025: आज के समय में भीमराव अंबेडकर के विचारों की प्रासंगिकता





भारत एक ऐसा देश है...जहां पर कोई व्यक्ति कितना ऊपर जाएगा..कितना नाम कमाएगा...ये बहुत हद तक इस बात से निर्भर करता है..कि वो किस जाति से जुड़ा हुआ है..जहां दूसरें देशों में व्यक्ति अपने ज्ञान से जाना जाता है...वहीं भारत जैसे देश में व्यक्ति अपनी जाति से बड़ा होता है...

ऐसे में भीमराव अंबेडकर के विचारों पर बात करना जरूरी हो जाता है..जिन्हें तमाम परेशानियों के बावजूद ये सिद्ध कर दिया..कि व्यक्ति अपने ज्ञान से बड़ा होता है..न कि अपनी जाति से..जिन्हें भारत का संविधान बनाया ..जो  विश्व सबसे बड़ा संविधान है...

जिनका मानना था कि धर्म वो है..जो मनुष्य को मनुष्य से जोड़कर रखता है....न कि वो जो व्यक्ति को व्यक्ति से अलग करता है...आज जब लोग धर्म के नाम पर एक दूसरे के खून का प्यासे बन हुए है...जहां वो खुद को बेहतर दूसरें को छोटा समझने लगे है..ऐसे में भीमराव अंबेडकर का ये विचार हम सबको एक नयी दिशा देता है..कि धर्म वो है..जो मनुष्य को मनुष्य से जोड़कर रखता है....न कि व्यक्ति को अलग करता है...

इस दुनिया की अगर कोई सबसे अच्छी रचना है..तो वो किताबें है..जो व्यक्ति ज्ञान देती है..उसके जीवन के अंधकार को खत्म कर उसे ज्ञान का प्रकाश देती है..ऐसे में उनका ये कथन की किताबों के सामने झुक जाओ तो तुम्हारे सामने दुनिया झुकी देंगी.. काफी हद तक हमें सही दिशा प्रदान करती  है..जो हमें किताबों की महत्ता बताता है...






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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..