क्या जमाना आ गया है जहां अपना हक मांगना भी लोगों को हमारा चतुर नजर आता है। जब तक चुप रहे कुछ न बोलो तो हम सही है। जहां हमारा बोलना सबको गलत नजर आता है। कैसे कहे उनसे कितना कुछ सहकर भी अब शांत रहने लगे। चतुर नहीं लोगों को देख अब हम थोड़ा समझदार होने लगे हैं।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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