हिंदू धर्म में वैसे तो हर एक त्योहार का महत्व होता है...लेकिन नवरात्रि सभी त्योहारों में काफी विशेष हो जाती है..जिसे एक दिन नहीं बल्कि पूरे नौ दिन लोग मनाते है.. देवी के नौ रूपों की विधि विधान से पूजा अर्चना करते है..,30 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरूआत हो रही है....
महिषासुर राक्षस की कहानी से जुड़ी है चैत्र नवरात्रि
अगर हम चैत्र नवरात्रि की उत्पत्ति की बात करें तो इसकी कहानी महिषासुर नाम के राक्षस से जुड़ी है..जिसने भगवान ब्रहाा को प्रसन्न कर ये वरदान मांगा था..कि उसका वंध कोई देवता या पुरूष नहीं कर पाएगा...तब भगवान ब्रहाा ने उसको वरदान दे दिया..लेकिन क्योंकि इस धरती पर जो आया है..उसका जाना निश्चित है..इसलिए भगवान ने वरदान दिया..कि उसका वध किसी स्त्री के हाथों को होगा..भगवान ब्रहाा के वरदान को पाकर राक्षस ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया..जिसकी दहशत से न धरती न आकाश सब लोग त्राहिमान त्राहिमान करने लगे..तब सभी देवों ने माता पार्वती ने महिषासुर का वंध करने की प्रार्थनी की...जिस बीच माता ने देवों की सहायता के लिए मां दुर्गा के रूप धारण किया ...मां दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिन तक युद्ध चला...दसवें दिन मां दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का वध कर दिया..ऐसी मान्यता है तब चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि थी...तब से चैत्र नवरात्रि मनाया जाने लगा...
इसलिए किया जाता है व्रत
वैसे तो मां की कृपा अपने भक्तों पर हमेशा ही रहती है.. लेकिन नवरात्रि भक्तों के लिए विशेष होती है..जब भक्त माता के खुश करने के लिए नवरात्रि का व्रत रखते है... उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है... किन्तु अगर कोई स्वास्थ्य के चलते नौ दिन तक उपवास नहीं कर सकता तो वो नवरात्रि का जोड़ा व्रत भी करके माता रानी को प्रसन्न कर सकता है...वो नवरात्रि का पहला और नवमे दिन का व्रत भी करके उनसे अपने इच्छित फल की प्राप्ति कर सकता है...
कलश स्थापना के पीछे ये है कारण
कलश स्थापना और कन्या पूजन की बात करें.. तो नवरात्रि में कन्या पूजन इसलिए किया जाता है... 1 से 10 साल की बच्चियों को माता रानी की रूप माना जाता है.. इसलिए नवरात्रि में उनका पूजन किया जाता है और उन्हें अपने समर्थ के अनुसार दक्षिण दी जाती है... इन कन्याओं के साथ काल भैरव के रूप में एक कन्ना का भी पूजन किया जाता है... क्योंकि माता रानी के साथ काल भैरव की पूजा करना अनिवार्य होता है... इसलिए जहाँ जहाँ माता रानी का तीर्थ स्थल वहाँ काल भैरव का मंदिर जरूर है...वही कलश स्थापना से घर पर चारों तरफ सकरात्मक ऊर्जा का वास होता है...

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