Navaratri Poem: नारी तुम केवल श्रद्धा की पात्र नहीं



नारी तुम केवल श्रद्धा की पात्र नहीं
नारी तुम सब भारी
तुम चाहो तो न अंतरिक्ष न धरती
तुम सब पर विजय प्राप्त कर सकती
तुम नहीं किसी की जागीर
तुम हो केवल शक्ति की स्वरूपा
जो साधारण नहीं असाधारण की प्रतिमूर्ति
नारी तुम केवल स्त्री नहीं 
पहचानों खुद को न रखों किसी बंधन में
नारी तुम केवल श्रद्धा की पात्र नहीं।

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