जब हमारे अपने हमें नहीं समझ पाते। तब हम दुनिया से क्या आशा करें की वो हमें समझ पाएगी।
हर इंसान के अच्छे बुरे दिन आते हैं फर्क इससे पड़ता है कि वो उसे किस तरह से लेता है।
हम बेमानी से सफलता तो पा सकते हैं लेकिन उसके काबिल बनने में एक अरस लग जाता है।
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