दुनिया की ऐसी कोई ताकत नहीं जो हमें कमजोर बना सके। फर्क केवल इससे पड़ता है कि हम खुद को कितना मजबूत मनाते है।
हमारी कमजोर तब ही हमारी कमजोरी है जब तक वो हमें पता है जैसे ही उसे हमारे शत्रु जानते हैं उसका दुरूपयोग शुरू हो जाता है।
गुलामी करना आसान आजाद रहना मुश्किल है।
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