दुनिया में जब निकलो तब मालूम चलता है
हम में अभी कितना बचपना है
जहां लोग पल में रंग बदलते
वहां हमें दुनिया के बीच रहन के लिए कितना कुछ सीखना है
जहां एक कर हमारी सारी गलतफहमी दूर हो जाती
जहां हमें अपनी लड़ाई खुद लड़ना होता है
कहने को सब बनते हमारे
पर इसके पीछे का सच होता दूसरा है
दुनिया कितनी अलग है ये हम तब समझते
जब हमारा विश्वास टूटता है
जब हमारे मजबूत बनने के अलावा कोई और विकल्प न शेष बचता है।
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