hope poem in hindi

ये आशायें भी कितना कुछ छिन लेती है इनसे
ये आशायें भी कितना कुछ छिन लेती है इनसे
जहां जीवन जीने की कला
जीने का आनंद छिन लेती है इनसे
सवालों के घेरे में रहकर
कुछ चीजों में जिंदगी सिमट सी जाती है
जहां इच्छा शून्य सी हो जाती है
कुछ बेहतर पाने की आशा में बहुत कुछ छिन लेती है इनसे। 

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