जब तक हमारे लिए कुछ नहीं बदलेगा। जब तक हम स्वयं नहीं बदलेंगे। उसे स्वीकार करने के लिए हमें बदलना होगा।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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