अपनी चुपी को जिसने अपनी ताकत बना ली
जो बोलता कम पर काम ज्यादा करता था
जो पब्लिसिटी से दूर अपने काम के प्रति हमेशा समर्पित रहता था
जिस न थी पद की चाहत न पैसे का लालच
जो वफादारी से जीता था
बात चाहे आर्थिक उदारीकरण की हो
या शिक्षा के अधिकार की
वो सबके विकास के बारे में सोचता था
जो रील में नहीं रियल में देश का विकास चाहता था
वो मनमोहन आज दुनिया से अलविदा कह गया
तो जाते जाते हमें बता गया
ऊंचा उड़ने के लिए विचार ऊंचे
जड़े अपनी मजबूत बनानी होती है ।

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