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Manmohan Singh passes away : मनमोहन का जाना एक सदी का अंत हो जाना है



अपनी चुपी को जिसने अपनी ताकत बना ली
जो बोलता कम पर काम ज्यादा करता  था
जो पब्लिसिटी से दूर अपने काम के प्रति हमेशा समर्पित रहता था
जिस न थी पद की चाहत न पैसे का लालच 
जो वफादारी से जीता था
बात चाहे आर्थिक उदारीकरण की हो
या शिक्षा के अधिकार की 
वो सबके विकास के बारे में सोचता था
जो रील में नहीं रियल में देश का विकास चाहता था
वो मनमोहन आज दुनिया से अलविदा कह गया
तो जाते जाते हमें बता गया
ऊंचा उड़ने के लिए विचार ऊंचे
जड़े अपनी मजबूत बनानी होती है । 

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..