मौन हुए मनमोहन
मनमोहन सिंह आज पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। इसी के साथ भारतीय राजनीति का एक अध्याय समाप्त हो गया है।
जो इतिहास में किस तरह से लिखा जाता है ये तो समय ही बताएगा। किन्तु इतिहासकारों को कुछ घटनाक्रम को तटस्थ लिखना होगा।
जहां मनमोहन का मौन केवल शब्दिक था। जहां उनका हर पल देश के विकास के बारे में सोचना था।
जिनकी दूरदर्शिता का कोई तोड़ न था। जो करनी पर विश्वास रखते थे।

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