एक तरफ देश भर में छठ मनायी जा रही है। दूसरी तरफ लोक गायिका शारदा सिन्हा ने अंतिम सास ली है। जिनको याद करना जरूरी है। उस समय जब लोकगीत के नाम पर अश्लीलता फैलायी जा रही है ऐसे समय में सादगी से अपने गीत को पेश करने की कला का परिचय शारदा सिन्हा के लोक गीत देते हैं। जो आज भले हमारे बीच में नहीं है। पर उनके गीत सदा हमारे बीच में रहेगें।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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