international men's day poem in hindi



तुम पुरुष हो ये सबने बताया तुम्हें
जिंदगी जीने का सलीका कहां सिखाया तुम्हें
कमाया तुमने खर्च कहां किया तुमने
पैसे का हिसाब करते जीवन गवाया तुमने
तुम क ई बार सही होकर गलत ही रहे
तुम्हारी कड़क आवाज के चलते तुम सही होकर भी गलत हो गये
तुम्हें खुद को अभिव्यक्त करना सिखाया कहां
तुम पुरुष ये कहकर तुम्हारा न जाने कितना शोषण हुआ। 

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