तुम पुरुष हो ये सबने बताया तुम्हें
जिंदगी जीने का सलीका कहां सिखाया तुम्हें
कमाया तुमने खर्च कहां किया तुमने
पैसे का हिसाब करते जीवन गवाया तुमने
तुम क ई बार सही होकर गलत ही रहे
तुम्हारी कड़क आवाज के चलते तुम सही होकर भी गलत हो गये
तुम्हें खुद को अभिव्यक्त करना सिखाया कहां
तुम पुरुष ये कहकर तुम्हारा न जाने कितना शोषण हुआ।

Comments