"खुश रहना है तो उम्मीद केवल खुद से रखो किसी और से नहीं। "
आज हमारे दुख का कारण कहीं न कही हम खुद है। जहां हम दूसरों से ये उम्मीद लगाकर बैठे है कि लोग हमारे बारे में अच्छा सोचेंगे। वो हमारे सपने पूरा करने में हमारी मदद करेगें। जबकि वास्तविक रूप में ऐसा कुछ नहीं है। हमारे अपने भी पहले अपने बारे में बाद में किसी और के बारे में सोचते हैं तो हम दुनिया से क्या याद उम्मीद कर सकते हैं।
"अगर तुम सूरज की तरह चमकना चाहते हो तो सूरज की तरह जलना सीखों"
आज के दौर में हर कोई सफलता तो प्राप्त करना चाहता है। लेकिन उसके लिए संघर्ष नहीं करना चाहता है । जबकि वास्तविकता यहीं हैं कि उसे जीवन में कुछ भी पाना है तो संघर्ष तो करना होगा। बिना संघर्ष के कुछ नहीं हो सकता है।

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