जिसका कर्ज इंसान चाह कर भी नहीं उतार सकता है।
इसके अलावा पितृ ऋण भी होता है । पितृ पक्ष वो समय होता है जब व्यक्ति अपने पितृ को प्रसन्न करने की कोशिश करता है। उन्हें मुक्ति दिलाने का काम करता है जिसके लिए वो बिहार के गया में उनका पिंडदान करता है। जो उन्हें मुक्ति की ओर ले जाता है।
ऐसे हम ये कह सकते हैं कि पितृपक्ष पितृ को याद करने का जरिया है। उनके मुक्ति का एक मार्ग हमें दिखाता है।

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