Vinesh Phogat: विनेश फोगाट बनना हरगिज़ आसान नहीं रह होगा





यू तो आज हर अखबार की सुर्खियों में   बड़े बड़े अक्षरों में शीर्ष पर तुम थी विनेश। जहां किसी ने तुम्हें भारत का मेडल‌ कहां तो किसी ने गोल्ड मेडल कहा। पर केवल तुम ही जानती होगी अंतराष्ट्रीय खेलों में तीन बार गोल्ड मेडल जीतने वाली अंतराष्ट्रीय मंच पर अपनी कुस्ती से लोहा मानवा लेने वाली विनेश ने पेरिस में ओलम्पिक में गोल्ड मेडल लाने के लिए कितने सालों तप किया होगा। 

  हरियाणा की धरती में जन्मी रेसलर तुमने यहां तक पहुंचने के लिए कितनी बार खुद को तोड़कर मजबूत किया होगा। 
जहां तुम्हारा सामना क ई बार हारी हुई विनेश से भी हुआ होगा। इसके बावजूद जब तुमने खुद को जिताने के लिए तैयार किया होगा। तब तुमने क ई बार संघर्ष की आग में खुद को जलाया होगा। 

तुम्हारा सफर भले तुमने ये कह खत्म कर दिया कि "कि कुस्ती जीत गई तुम हार गई" पर इससे पहले तुमने कितनी बार कुस्ती को हारकर खुद को जिताया होगा। 
बेशक तुम्हारे संयास लेने की घोषणा से बहुत से दिल टूटे होगें । किन्तु तुम्हारा हदय उस वक्त कितना करूणा से भर उठा होगा। जब तुम्हें 50 किग्रा की केटेगिरी में मात्र 100 किग्रा के भार से अयोग्य घोषित किया गया हो। 
कहने को हर कोई भले आज तुम्हें दिलाशा दे रहा हो। पर तुम ही जानती हो या तक आने के लिए तुम्हें कितना कुछ सहना किया होगा। 

तुम भले इतिहास न‍ बना सकी। इतिहास के पन्नों में अपना नाम न दर्ज कर सकी। किन्तु तुम्हें इतिहास याद रहेगा। जिसने ओलम्पिक के खेल में एक दिन में तीन तीन खेल जीते हो। जिसने हराया भी उसे हो जिसे अब तक किसी ने हारा न पाया होगा। 



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