इसे विडम्बना न कहूं तो क्या। जहां लोग मौका देख पलट जाते हैं। जो कल तक देते थे गालियां वो उसकी कामयाबी देख उसे अपना रिश्तेदार कहने लगते हैं। जैसे अपने इस व्यवहार से वो हमें याद दिलाते हैं कि समय से बड़ा इस दुनिया में कोई नहीं। जो चाहे तो किसी इंसान को बना सकता है। तो किसी इंसान को बिगाड़ सकता है जिसके आगे हर कोई कम ही नजर आता है।
इसलिए तो कहती है जो काम कर रहे हो । जिसमें तुम्हें लगता है तुम बुलंदियां छू सकते हो उसके लिए तुम लोगों को न देखों। दुनिया का क्या है वो तो समय रहते पलट जाएगी।

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