किसी देश का तिरंगा उसकी आन बान शान होता है। जिसके नाम से वो जाना जाता है। जिसका अपना महत्व होता है। जिस पर लिपटकर आने का हर किसी का सपना होता है।
पर अफ़सोस जब इस तिरंगे का बिना महत्व जाने इसका ध्वजा रोहण करने की कोशिश की जाती है। तब कहना जरूरी हो जाता है कि नायाब चीज नायाब ही रहे तो बेहतर है वरना उसका महत्व कम हो जाता है।
इस बार भी पिछली बार की तरह' हर घर तिरंगा अभियान' चलाया जा रहा है जहां घर में तिरंगा लहराने की कोशिश की जा रही है।
किन्तु इस बीच उसे फहराने के नियम को ताक पर रखा जा रहा है। जो ध्वज न होकर सजावटी वस्तु में तब्दील करने की कोशिश की जा रही है।
फिर भले क्यों उसके अगले दिन वो सड़कों पर पड़े मिले इसकी भले किसको फ्रिक है।
जो महीनों महीनों तक लोगों के घर पर फहराता रहे इसकी कि किसे चिंता है।
Comments