बदलते वक्त के साथबदल जाना तुम
वहां जहां बदलाव जरूरी हो
बदलते वक्त के साथ
वहां आगे बढ़ जाना तुम
जहां ठहराव से ज्यादा चलना जरूरी हो
आंसू पोछ आगे बढ़ जाना तुम
जहां तुम्हारा निडर होकर चलना जरूरी हो
कौन क्या कहता है इस सब से अलग अपने आप को बेहतर बना लेना तुम
जब बात तुम्हारे स्वाभिमान की हो।
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