जो गरल हंसकर पी जाएं
जटाएं खोल युग की गंगा को धारण कर ले। "
आज से सावन सोमवार शुरू हो गया है जिसका अपना धार्मिक और सामाजिक महत्व है जो शिव का प्रिय माह माना जाता है। इसके अलावा सावन सोमवार को लेकर ये भी मान्यता है कि भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान सृष्टि की रक्षा के लिए विष का पान कर लिया था जिससे उन्हें काफी कष्ट हुआ था।
तब उस समय सावन का समय चल रहा था।
इस तथ्य पर अगर गौर किया जाए तो शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए विष का पान किया।
अपार कष्ट को सहा। पर आज के समय के समय में शिव का होना लगभग मुश्किल सा है जहां हर कोई खुद को सुकून देने के लिए विष उगल रहा है। जहां अमृ
त का पान तो कर रहा है पर उसके मध्य में गिरने वाले विष से दूर भाग रहा है जो कहीं न कही अराजकता का माहौल पैदा कर रहा है। जहां केवल अपने हित के लिए वो अनगिनत विष की नदियां बह रहा है।

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