समय के साथ इंसान की जिंदगी के उतार चढ़ाव भले न बदले। किन्तु उसका कहने का लाहजा पूरी तरह से बदल जाता है। जहां वो शिकायत करना छोड़ अपनी बात रखना सीख जाता है।
जहां उसके सबकुछ ठीक है कहने के पीछे जिंदगी का गहरा दर्द छिपा हुआ होता है। जिसे कहने के लिए बहुत ही हिम्मत चाहिए होती है।
जहां जिंदगी चाहे कितनी बिखरी हो पर दूसरों की जिंदगी को जोड़ने की कोशिश जैसे उसकी हर पल जारी होती है।

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