"तेज आवाज में जरूरी नहीं हर इंसान बात करने का शौकीन ही हो
अक्सर परिस्थितियां उसे
बोलने को मजबूर कर देती है"
वो शांत रहने वाली लड़की ,सबकुछ सुन लेने वाली लड़की तब बोलने पर मजबूर हो जाती है। जब उसकी सुनने की हद पार हो जाती है। वो तब कहने लगती है जब उसे ही गलत करार कर दिया जाता है। एक लड़की जब घर से बाहर कमाने निकलती है तब वो अनेक तरह की परेशानी का सामना कर आगे बढ़ती है।
जहां घर से लेकर बाहर तक उसकी जिम्मेदारी बढ़ी होती है उसके बावजूद जब वो आगे चलती है तब वो बोलने लगती है जब किसी चीज की अति हो जाती है ।

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